ज़िन्दगी के अँधेरे में
जब कभी होता हूँ अकेला
यादों के जमे मोम के शमां जलाकर
रौशनी कर लेता हूँ
फिर हरेक यादों के मोम पिघलकर
फिर जम जाते हैं
किसी और शाम को रौशन करने के लिए....
जब कभी होता हूँ अकेला
यादों के जमे मोम के शमां जलाकर
रौशनी कर लेता हूँ
फिर हरेक यादों के मोम पिघलकर
फिर जम जाते हैं
किसी और शाम को रौशन करने के लिए....