अपनों के भीड़ में किसी अजनबी से दोस्ती की है,
खाए हैं इतने चोट की अब जख्मों से प्यार है,
टूटे हैं ख्वाब हर बार मेरे शीशों की तरह,
हकीकत कड़वी ही सही, अब उसी से प्यार है,
पाने की हर कोशिश जब हो गए नाकाम मेरे,
मंजिल नामुमकिन तो अब रास्तों से प्यार है,
हालातों के थपेडों ने कर दिया है मजबूर मुझे,
जो कुछ भी की है हासिल, अब उन्ही से प्यार है,
खुल के कहने की कई बार की मैंने कोशिश,
अब कोई न सुने तो अब खामोशी से ही प्यार है,
पाने को कई बार मचल पड़ा था मन मेरा,
अब आंखों से ओझल, इतनी दूर पर तब भी प्यार है,
हर गम के घूंट पीने के बाद हैं मैंने ये जाना,
तू मिले या न सही, हर कोशिश से मुझे प्यार है।
खाए हैं इतने चोट की अब जख्मों से प्यार है,
टूटे हैं ख्वाब हर बार मेरे शीशों की तरह,
हकीकत कड़वी ही सही, अब उसी से प्यार है,
पाने की हर कोशिश जब हो गए नाकाम मेरे,
मंजिल नामुमकिन तो अब रास्तों से प्यार है,
हालातों के थपेडों ने कर दिया है मजबूर मुझे,
जो कुछ भी की है हासिल, अब उन्ही से प्यार है,
खुल के कहने की कई बार की मैंने कोशिश,
अब कोई न सुने तो अब खामोशी से ही प्यार है,
पाने को कई बार मचल पड़ा था मन मेरा,
अब आंखों से ओझल, इतनी दूर पर तब भी प्यार है,
हर गम के घूंट पीने के बाद हैं मैंने ये जाना,
तू मिले या न सही, हर कोशिश से मुझे प्यार है।
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