Monday, August 8, 2011

मार्गदर्शन

तीव्र चाल,
फिर दौड़,
नया जोश,
ढेर सारी उमंग,
हल्की सी थकान,
पुनः उत्साह,
मंद चाल,
फिर थकान,
ठोकरें,
अवरोध,
प्रयास,
असमर्थता,
क्षणिक विश्राम,
पुनः प्रयास,
विफलता,
अनगिनित प्रयास,
अनगिनत हार,
बढ़ती व्यस्तता,
और साथ साथ व्यग्रता,
बढ़ती जिम्मेदारियों की ठण्ड,
कम होती उम्र की रजाई,
फिर,
सामंजस्य,
स्व-अनुरूप चाल,
एकरसता,
उड़ते अरमानों के बादल के तले,
लम्बी जीवन के पगडंडी पर,
यथार्थ के कड़े धूप को सहते,
नियति के नियंत्रण में,
मैं अब निशब्द,
चला जा रहा हूँ,
किसी अनजाने गंतव्य की ओर...
अनचाही, अनजानी, अनकही, अपराध-बोध से ग्रसित,
कोई अपरिचित सा मार्गदर्शन...

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