घने काले बादल सा तेरी नाराज़गी,
सच्चे धूप सा मेरे प्यार की संजीदगी,
और फिर झूम झूम कर
सब कुछ बरस बरस कर,
बरसों से जमे खामोशी अब पिघल गए,
सब बारिश के धार में मिल गए,
अब जा कर सब थम सा गया है,
प्रस्फुटित स्नेह-किसलय नरम सा है!
सच्चे धूप सा मेरे प्यार की संजीदगी,
और फिर झूम झूम कर
सब कुछ बरस बरस कर,
बरसों से जमे खामोशी अब पिघल गए,
सब बारिश के धार में मिल गए,
अब जा कर सब थम सा गया है,
प्रस्फुटित स्नेह-किसलय नरम सा है!
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