Thursday, November 15, 2007

मेरी इंटरनेट पर देवनागरी मे लिपित प्रथम अभिव्यक्ति

ये मेरा सौभाग्य है कि आज मैं अपनी सबसे प्रिय भाषा हिन्दी में ब्लोग पोस्ट कर पा रहा हूँ। मैंने इसके पूर्व बहुत प्रयास किया था कि बाकी और सज्जनो के तरह मैं भी अपने विचारो कि अभिव्यक्ति अपनी भाषा में कर पाऊं , परन्तु अनेकानेक असफल प्रयासों के पश्चात् आज मेरा स्वप्न साकार हो ही गया। कहते हैं "जहाँ चाह वहाँ राह"। और दूसरी कहावत हैं न कि "अंधे को क्या चाहिऐ, दो आँखें"। बस अब मैं तो खूब लिखूंगा और खूब आनंदित होऊंगा। शायद मेरी यह स्वान्तः सुखाय की भावनाओं से लिखी मेरी आपबीतियाँ आप सबो को भी कुछ आनंद पंहुचा पाए। बस आज के लिए इतना ही...

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